ज्वालामुखी मंदिर कांगड़ा | ज्वाला देवी मंदिर की पूरी जानकारी- Jwalamukhi Mandir Yatra In Hindi

Jwalamukhi Mandir, Kangra In Hindi: आज हम सती के 51 शक्तिपीठों में से एक ज्वाला देवी के नाम से प्रसिद्ध ज्वालामुखी मंदिर शक्तिपीठ के बारे में जानेंगे. ज्वालामुखी मंदिर को ज्वालाजी मंदिर या ज्वाला देवी के नाम से भी जाना जाता है. यह मंदिर हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में राज्य की राजधानी धर्मशाला से करीब 55 किमी दूर स्थित है. ज्वाला देवी का यह मंदिर हिन्दू देवी माता शक्ति को समर्पित है. जहा पर पिछले अंनत वर्षो से नौ ज्वालाएं निरन्तर जलती रहती हैं.और यही इस शक्तिपीठ मंदिर का रहस्य बना हुआ है.

ज्वालामुखी मंदिर कांगड़ा | ज्वाला देवी मंदिर की पूरी जानकारी- Jwalamukhi Mandir Yatra In Hindi
Jwalamukhi Mandir, Kangra photo

जो भारतवर्ष समेत पूरी दुनिया में हिंदू धर्म तीर्थयात्रियों को आकर्षित करती हैं. मंदिर में निरंतर जल रही इन नौ ज्वालाओं के कारण इन्हें माता शक्ति के नौ देवियों के रूप में पूजा की जाती है. यह एक ऐसा रहस्मयी हिंदू मंदिर है जहां किसी भी देवी या देवताओं की कोई मूर्ति स्थापित नहीं है.बल्कि निरंतर ज्वलंत नौ अग्नि के चमत्कारिक लौ की ही पूजा की जाती है.तो वहीं दूसरी तरफ विज्ञान का यह मानना है कि कांगड़ा पहाड़ी के इन चट्टानों से ज्वलनशील गैस के प्राकृतिक जेट के कारण यह आग की लौ जलती रहती है.

हालांकि, हिन्दू धर्म में आस्था रखने वाले भक्तों के मन वँ मष्तिक में इन ज्वालाओं में देवी का आभास प्रतीत होता है. इस मंदिर में यही सबसे बड़ा आस्था का केंद्र हैं. जहां हर साल चैत्र नवरात्र और आश्विन नवरात्र में लाखों भक्त माता के दर्शन के लिए यहां आते हैं. रबड़ी का प्रसाद इस मंदिर का मुख्य प्रसाद हैं. तो चलिए आज इस आर्टिकल के माध्यम से आपको यात्रा करते हैं ज्वालादेवी मंदिरकी।

ज्वालामुखी मंदिर का रहस्य और कहानी - Mystery and story of Jwalamukhi Mandir In Hindi

Jwalamukhi Mandir:- ज्वाला देवी मंदिर को आप अद्भुत अजूबा अविश्वसनीय भी कह सकते हैं. इस मंदिर में किसी मूर्ति की पुजा नही होती हैं बल्कि माता पृथ्वी के गर्भ से निकल रही नौ ज्वालाओं (अग्नि )की पूजा की जाती हैं.मन्दिर में इन प्रज्वलित अग्नि को मातारान के नौ रूप महाकाली, अन्नपूर्णा, चंडी, हिंगलाज, विंध्यावासनी महालक्ष्मी, सरस्वती, अम्बिका, अंजीदेवी के नाम से पूजा जाता है। इस मंदिर को ज्वाला देवी, जोता वाली,तथा नगरोटा वाली माता मंदिर भी कहते है।

ज्वालामुखी देवी मंदिर मे प्रज्वलित नौ ज्वालाओं को मुस्लिम आक्रान्ता अकबर तथा कई ब्रिटिश अधिकारी ने बुझाने का अनेक प्रयास किया था, परन्तु आजतक कोई सफल नही हुआ और यह ज्वाला सदियों से युगों से यूंही प्रज्वलित होती रहती हैं.पर आजतक दुनिया का कोई भी वैज्ञानिक इस बात का कोई वैज्ञानिक आधार या पुष्टि नहीं कर पाया।हर कोई सनातन शक्ति के आगे नतमस्तक हुआ।

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ज्वालामुखी मंदिर का इतिहास- History of Jwala Devi Mandir, Kangra In Hindi

हिंदू धर्म ग्रँथ के अनुसार ज्वालामुखी मंदिर वर्तमान में जिस स्थान पर है उसी स्थान पर माता सती का जीभ गिरा था जिसे ज्वाला देवी के नाम से जाना जाता है. शिव पुराण के अनुसार- सती के पिता राजा दक्ष प्रजापति ने जब यज्ञ का आयोजन किया औऱ अपने दामाद महादेव को आने के लिए निमंत्रण नही दिया।उसके बावजूद भी सती अपने पिता के घर यज्ञ में शामिल हो गई।

जहां पर अपने ही पिता राजा दक्ष द्वारा  माता रानी जब खुद को अपने पति परमेश्वर देवों के देव महादेव को सती के पिता द्वारा अपमानित किया गया तो वे अग्नि में कूद पड़ी।जिसके बाद उनकी शरीर को विष्णु द्वारा विखंडन किया गया तो पृथ्वी के अलग अलग हिस्सों पर गिरी थी, जिसमें यहां उनकी जीभा गिरी हुई थी। यह हिमाचल प्रदेश राज्य के कांगड़ा में स्थित हैं. जो ज्वाला मुखी मन्दिर के नाम से प्रसिद्ध हैं.यह बाकी सभी शक्तिपीठों से अलग है,

ऐसा कहा जाता है कि ज्वालामुखी  मन्दिर को खोजने का श्रेय पांडव पुत्रों को जाता है। जिसके बाद यही पर पूजन प्राम्भम हुआ,इस मंदिर का प्राथमिक निमार्ण राजा भूमि चंद के करवाया था। जिसे बाद में महाराजा रणजीत सिंह और राजा संसारचंद ने 1835 में इस मंदिर का पूर्ण निमार्ण कराया था।और यही कारण है कि यहां हिन्दुओ के सिख समाज भी आते है. इस मंदिर में पिछले सात दशकों से भूगर्भ विज्ञानी इस क्षेत्र में तंबू गाड़ कर बैठे हैं,यहां की नौ ज्वाला प्रज्वलित का पता लगाने के लिए, लेकिन वह भी इस ज्वाला की जड़ तक नहीं पहुंच पाए।

ज्वालामुखी मंदिर और मुस्लिम शाषक अकबर की प्रसिद्ध कथा-

एक बार की बात है मातारानी के भक्त दर्शन करने कांडरा जा रहे थे ,लेकिन रास्ते मे उन लोगों को रोक अकबर के दरबार मे पेश किया था, जहां पर शिव- शक्ति भक्त ध्यानु भगत द्वारा बताई गई माता रानी की महिमा की बात सुन कर अकबर ने एक चैलेंज स्वीकार कर लिया। और एक निर्दोष जीव अश्व की गर्दन कटवा दी थीं।और बोला कि तुम अपने मातारानी से कह इस जीव को पुनः जीवित करवा दो।

जिसके बाद ध्यानु भगत अपने तमाम साथियों को लेकर ज्वालामुखी मंदिर पहुंच कर पूजा अर्चना की। मातारानी से विनती की और मातारानी ने अपने भक्तों की विनती स्वीकार कर उस मरे हुए अश्व को पुनः जीवित कर दी,जिसके बाद अकबर इस चमत्कार को देख हैरान हुआ और क्रोधित हो अपने सैनिको के साथ कांडरा पहुचकर  ज्वालामुखी मंंंदि रर में नौ अखण्ड प्रज्वलित ज्वाला को बुझाने का पूरा प्रयास किया।

और अंतः वह असफल रहा, जिसके बाद अकबर वहां सर पटक कर क्षमा मांगी, और मातारानी की इस अपरम्पार महिमा को देख वह 50kg सोने से बना हुआ एक क्षत्र चढाया था। जिसे माता रानी ने वह छतर कबूल नहीं किया और वह छतर गिर कर किसी अन्य पदार्थ में परिवर्तित हो गया |जो आज भी वह छतर ज्वालामुखी देवी के मंदिर में देख सकते हैं |

इसके अलावा कई ब्रिटिश अधिकारी ने भी अपने अंग्रेज अफसर से कह में अपनी तरफ से पूरा जोर लगा दिया कि जमीन के अंदर से निकलती इस ऊर्जा का इस्तेमाल किया जाए। और इसका अन्य किसी कार्य में  अग्नि का प्रयोग किया जाए।परन्तु ये लोग भी असफल रहे।

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ज्वालामुखी मंदिर के आसपास अन्य दर्शनीय स्थल वं तीर्थ स्थल- Visiting Places Near Jwalamukhi Mandir In Hindi

ज्वालामुखी मंदिर के आसपास अन्य दर्शनीय स्थल वं तीर्थ स्थल-

ज्वालामुखी मन्दिर के द्वार बहुत ही खूबसूरत हैं.यह मंदिर हिमाचल के पहाड़ों पर स्थित हैं, जिसे यह काफी सुंदर दिखता है. यहां प्रतेयक वर्ष लाखो लोग दर्शन करने आते पहुचते हैं, खासकर नवरात्र में । यहां आपको हमेशा माता का जागरण देखने को मिलता हैं।इस मंदिर के बगल में ही एक नहर भी है. तथा पास मे ही गोरख डिब्बी का मन्दिर चमत्कारिक स्थान हैं,

जिसे गोरख डिब्बी के नाम से जाना जाता है। प्रचीन कथा अनुसार यहाँ गुरु गोरखनाथ जी पधारे थे और कई प्रकार के चमत्कार दिखाए थे।  यहाँ पर खौलता हुआ एक पानी का कुण्ड हैं, परन्तु वास्तव मे यह कुंड का पानी ठंडा है। इनके अलावा नगिनी माता मंदिर है. 5 कि.मी. कि दूरी पर स्थित रघुनाथ जी का मंदिर है जो प्रभु राम, लक्ष्मण और सीता को समर्पित है।

इसके अलावा आप हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में इन अंबकेश्वर महादेव धाम मंदिर ,प्राचीन लाल शिवालय मंदिर, रघुनाथजी मंदिर व टेढ़ा मंदिर,मां तारिणी मंदिर,भैरव बाबा मंदिर,अष्टभुजा मंदिर,चौमुख मंदिर और बगलमुखी माता मंदिर का दर्शन कर सकते हैं।

ज्वाला देवी के आरती का समय –  Aarti Timings In Jwala Devi In Hindi

ज्वालामुखी मंदिर ज्वाला देवी का आरती भी आकर्षक का केंद्र होता है. इस मंदिर में पूरे दिनभर में पांच आरती तथा एक हवन भी किया जाता है.दिन का पहला आरती  सुबह 4:30 बजे होती हैं जिसे श्रृंगार आरती कहते हैं.
श्रृंगार आरती के आधे घंटे बाद मंगल आरती की जाती है इसके बाद तीसरी आरती दोपहर में तथा चौथी आरती में मध्यानकाल की जाती हैं. जिस दौरान भोग लगाया जाता है. इसके बाद दिन की आखरी और पांचवी आरती शाम को शयन आरती होती है।


ज्वाला देवी के दर्शन का समय- Darshan Time in Jwalamukhi Mandir In Hindi


ज्वालामुखी मंदिर में गर्मियों में दर्शन का समय सुबह 5 बजे से रात 10 बजे तक का होता है. तो वहीं सर्दी के दिनों में सुबह 6 बजे से रात 9 बजे तक दर्शन के लिए खुला रहता है।

ज्वालामुखी मंदिर जाने के लिए सबसे अच्छा समय – Best Time To Visit Jwalamukhi Mandir In Hindi Kangra In Hindi


ज्वालामुखी मंदिर जाने का सबसे बेस्ट समय चैत्र नवरात्र या आश्विन नवरात्र का पवित्र महीना माना जाता है. इस दौरान यहां बहुत बड़ा मेला का भी आयोजन किया गया है.

कैसे पहुंचे ज्वालामुखी मंदिर- How Can I Reach Maa Jwalamukhi Mandir In Hindi

ज्वाला देवी का मंदिर आप हवाई मार्ग ,रेल मार्ग औऱ सड़क मार्ग द्वारा जा सकते हैं।

हवाई मार्ग- हवाई मार्ग से ज्वाला देवी मंदिर कांगड़ा पहुचने के लिए सबसे पहले आपको कांगड़ा का निकटतम हवाई अड्डे गग्गल हवाई अड्डा आना होगा।यह कांगड़ा से करीब 14 किमी की दूर हैं। इसके अलावा आप दिल्ली, शिमला हवाई अड्डे आकर भी कांगड़ा आ सकते है।

रेल मार्ग- रेल मार्ग से ज्वालामुखी मंदिर पहुचने के लिए सबसे पहले आपको जालंधर रेलवे स्टेशन आना होगा।
वहां से आप टैक्सी से कांगड़ा जा सकते है।

सड़क मार्ग- रेल और हवाई मार्ग के आलवा आप सड़क मार्ग से ज्वाला देवी मंदिर पहुंच सकते है।

हमारे साइट पर आने के लिए आपका बहुत धन्यवाद !

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Conclusion:- आज का यह लेख हिमाचल प्रदेश में स्थित 51 शक्तिपीठों में से एक ज्वालामुखी मंदिर ज्वाला देवी मंदिर के बारे में है ज्वाला देवी कैसे जाए,ज्वाला देवी उतप्ती कैसे हुई, का यह जानकारी आपको कैसा लगा। क्या यह Jwalamukhi Mandir, Kangra In Hindi यह जानकारी आपके लिए पर्याप्त है. और अगर है तो आप हमें अपने विचार कमेंट कर बताएं। हम आपके हर एक प्रश्न का उत्तर देने के लिए तैयार है।

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